यूँ तो मैं उत्तर भारतीय लोगो की संगत में ज्यादा रहा हूँ , बचपन से उनकी जीवनशैली का बड़ा ही गहरा प्रभाव पड़ा है मुझपर | पर कारण जो भी हो उनके साथ मुझे बड़ा ही अपनापन सा लगता है, अभी हल ही में कुछ बिहारियों के ब्लॉग पर ज्यादा नज़र है मेरी | शायद इस उम्मीद में की उनसें कुछ शब्द ही चुरालू पर जो पाया उससे ये लगता है , एक बिहारी दुसरे बिहारी की टांग खीचकर आगे बढना चाहता है |
गल-काट प्रतियोगिता तो नहीं पर यहाँ काबलियत का बड़ा चड़ाकर तुलनात्मक प्रदर्शन किया जा रहा है | और बताया जा रहा है की भाई तुम बड़े हुए तो क्या हुआ , हम भी कुछ कम नहीं है | उनके ब्लॉग को पढ़ते हुए , मेरे मन में बचपन की एक घटना बार -बार सदृश्य होती जा रही थी की | एक बार बचपन में हमारे दोस्तों में लड़ाई हो गई , कोलर फाड़ लड़ाई ही सोच लीजिये तो उसी समय हमारे एक मित्र ने कहा था " एक बिहारी सब पर भारी " यूँ तो उस समय मुझे हंसी तो नहीं आई | पर अब सोच- सोचकर बहुत हँसता हूँ |
आप मुझे ये ना सोचे की " मैं बिहारियों पर व्यंग कर रहा हूँ " , मेरी केवल ये एक प्रस्तुती मात्र है | जिसमें मैंने जो पढ़ा और विचार किया वही लिख दिया | की आजकल सफल लोग को आपने दुश्मन बनाने नहीं पड़ते लोग खुद ही उन्हें दुश्मन मानने लग जाते है | तो भाई बड़ा क्यों दिखना चाहते है , हाँ अगर बड़े विचार रखो और उन्हीं का प्रचार करो और ये सोचो की कोई जो तुम्हें पढता है |
वो तुमसें कुछ पाना ही चाहता है , तो तुम दो उसे वो बार-बार तुम्हें पढ़ेगा | वैसे तुम जो कर रहे है , उससे तुम उस व्यक्ति को सर पर बैठा रहे हो जिसके साथ तुम बैठना चाहते हो | और ये सच सुन लो कोई नफरत से पढ़े या प्यार से पढ़ता तो है | ( जिनका चित्र दिया हूँ .....उनको मैं एक आदर्श नहीं मानता हूँ .... उनके साथ वाले भी आदर्श है मेरे )

Very Nice Post GOOD GOOD ......
ReplyDeleteआगामी शुक्रवार को चर्चा-मंच पर आपका स्वागत है
ReplyDeleteआपकी यह रचना charchamanch.blogspot.com पर देखी जा सकेगी ।।
स्वागत करते पञ्च जन, मंच परम उल्लास ।
नए समर्थक जुट रहे, अथक अकथ अभ्यास ।
अथक अकथ अभ्यास, प्रेम के लिंक सँजोए ।
विकसित पुष्प पलाश, फाग का रंग भिगोए ।
शास्त्रीय सानिध्य, पाइए नव अभ्यागत ।
नियमित चर्चा होय, आपका स्वागत-स्वागत ।।
बहुत बेहतरीन....
ReplyDeleteमेरे ब्लॉग पर आपका हार्दिक स्वागत है।
बहुत ही बेहतरीन और प्रशंसनीय प्रस्तुति....
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